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जंगलराज पर भारी पड़ा सुशासन, एनडीए की बंपर जीत

        

-                                                                                 एनडीए को 202 सीट, बीजेपी 90, जेडीयू 83, एलजेपी 19 सीट पर जीती
                                                            महागठबंधन की शर्मनाक हार, कुल 36 सीट जीते, आरजेडी को 26 सीट और कांग्रेस को मात्र 6 सीट मिली

आचार्य चाणक्य ने राजनीति को राष्ट्रधर्म की नीति बनाने के लिए अपना जीवन लगा दिया था और वो धरती थी मगध यानी बिहार की थी। इस धरती को यदि राजनीति की पाठशाला कहा जाए तो गलत नहीं होगा। फिर भी ये स्थान भारत के अन्य राज्यों की तुलना में पीछे है। देश को राजनैतिक पुरोधाओं की लंबी फेहरिस्त देने वाले इस राज्य बिहार ने 2025 का अपना जनमत जाहिर कर दिया है, और इस जनमत परिणाम ने सभी को चौका कर रख दिया....एक तरफा जीत, क्लीन स्वीप, बंपर विजय....इसे इन्हीं संज्ञा से संबोधित किया जा रहा है।

आज एक बहुत बड़े राजनैतिक परिदृश्य का अनावरण हुआ है.....वो है बिहार....बिहार विधानसभा 2025 में एनडीए के गठबंधन विपक्ष का लगभ सूपड़ा साफ कर दिया, एनडीए को बिहार की कुल 243 सीटों में से लगभग 202 सीटों पर जीत हासिल की है, बिहार की जनता ने सुशासन और नरेंद्र मोदी के विकास के मॉडल को चुना और आगे बढ़ाया है। भाजपा को करीब 90 सीट, जेडीयू को 83 सीट और एनडीए की एलजेपी(आरवी) को 19 सीट मिली है। वहीं तेजस्वी की पार्टी को बमुश्किल 26 सीट हासिल कर सकी है और कांग्रेस पार्टी एक बार फिर नाकारा ही साबित हुई उसे मात्र 6 सीट मिली। महागठबंधन को कुल मिलाकर 36 सीट पर सिमट कर रह गयी।

बिहार में नीतीश कुमार की बेदाग छवि, सुशासन और राज्य के विकास की नीयत ने जीत दिलायी है, और सबसे बड़ी बात शराब बंदी जिसने महिलाओं को नीतीश कुमार की ओर आकर्षित किया, बिहार में नीतीश ने शराब बंदी से समझौता नहीं किया और इसका परिणाम यह रहा कि महिलाओं ने भारी मात्रा में 71 प्रतिशत अपने मत का प्रयोग किया, इसके साथ ही बिहार में 2025 चुनाव में 1951 के रिकॉर्ड तोड़ते हुए 67 प्रतिशत वोटिंग की। वोटिंग प्रतिशत के बढ़ने का मतलब साफ होता है कि भाजपा के खाते में वोट बढ़ा है।

बिहार को भारत का एक पिछड़े राज्य के तौर पर देखा जाता रहा है, लेकिन विकास की राजनीति को चुनकर जंगल राज की वापसी को नकार दिया है। बिहार चुनाव प्रचार के दौरान सबसे ज्यादा बात जंगल राज की हो रही है, उस दौर के हर उन घटनाओं को एनडीए ने जन-जन तक बताया कि किस प्रकार से लालू राज में बिहार गर्त में चला गया था और अपराध का राजनीतिकरण कर दिया गया था।

यदि बिहार के रिजल्ट के मुख्य कारणों की चर्चा की जाए तो इसमें सबसे बड़ा फैक्टर है एनडीए के समीकरण का, जिस सुलझी नीयत के साथ एनडीए ने चुनाव लड़ा वह जीत का कारण बना, वहीं महागठबंधन के आरजेडी अपनी सुझली और साफ सुथरी राजनीति का प्रदर्शन नहीं कर पायी।

 

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